बसंत ऋतु क्यों आई
फिर तन्हाई ने ली अंगड़ाई
फिर घिर याद किसी की आई
बसंत ऋतु क्यों आई
न तुम हुये हमारें दिलबर
याद हमें क्यू आते हो
यादो में आ -आ क्र फिर
क्यों तुम मुझको तदफाते हो
वीराना सा लगे जमाना
कुछ आस -पास न भाये
बैठ अकेले देखे राहें
तुम फिर नजर न लाओ
ये वीराना .....ये तन्हाई .......
हाय !क्यों ........फिर लौट है आई
बसंत ऋतु क्यों आई
लोग कहें फिर फूल खिलें है
मन न माने........न ले अंगड़ाई
फिर तन्हाई है भाई
फिर घिर याद तुम्हारी आई
मन भटके बेचैन करें
कुछ भी न दे सुनाई
समय हुआ अब चलों जहाँ से
अब कुछ न दे दिखलाई
बसंत ऋतु क्यों आई
मन भीतर सब सूना-सूना
तन्हाई हाय ......तन्हाई ही भाई
तेरा नाम न निकलें मुहँ से
हो न तेरी रुसवाई .....
कोई कहे......कोई सुने क्या
कैसी घड़ी ये आई
बसंत ऋतु क्यों आई
हाय! बसंत ऋतु क्यों आई !
लोग कहे फिर फूल खिले हैं
मन न मानें .....न लें अंगड़ाई
फिर तन्हाई है भाई
फिर घिर याद तुम्हारी आई
मन भटके बेचैन करे
कुछ भी न दे सुनाई
समय हुआ अब चलो जहाँ से
अब कुछ न दे दिखलाई
बसंत ऋतु क्यों आई
मन भीतर सब सूना-सूना
तन्हाई हाय ......तन्हाई ही भाई
तेरा नाम न निकलें मुहँ से
हो न तेरी रुसवाई ......
कोई कहे ........कोई सुने क्या
कैसी घड़ी ये आई
बसंत ऋतु क्यों आई
हाय! बसंत ऋतु क्यों आई !
फिर तन्हाई ने ली अंगड़ाई
फिर घिर याद किसी की आई
बसंत ऋतु क्यों आई
न तुम हुये हमारें दिलबर
याद हमें क्यू आते हो
यादो में आ -आ क्र फिर
क्यों तुम मुझको तदफाते हो
वीराना सा लगे जमाना
कुछ आस -पास न भाये
बैठ अकेले देखे राहें
तुम फिर नजर न लाओ
ये वीराना .....ये तन्हाई .......
हाय !क्यों ........फिर लौट है आई
बसंत ऋतु क्यों आई
लोग कहें फिर फूल खिलें है
मन न माने........न ले अंगड़ाई
फिर तन्हाई है भाई
फिर घिर याद तुम्हारी आई
मन भटके बेचैन करें
कुछ भी न दे सुनाई
समय हुआ अब चलों जहाँ से
अब कुछ न दे दिखलाई
बसंत ऋतु क्यों आई
मन भीतर सब सूना-सूना
तन्हाई हाय ......तन्हाई ही भाई
तेरा नाम न निकलें मुहँ से
हो न तेरी रुसवाई .....
कोई कहे......कोई सुने क्या
कैसी घड़ी ये आई
बसंत ऋतु क्यों आई
हाय! बसंत ऋतु क्यों आई !
लोग कहे फिर फूल खिले हैं
मन न मानें .....न लें अंगड़ाई
फिर तन्हाई है भाई
फिर घिर याद तुम्हारी आई
मन भटके बेचैन करे
कुछ भी न दे सुनाई
समय हुआ अब चलो जहाँ से
अब कुछ न दे दिखलाई
बसंत ऋतु क्यों आई
मन भीतर सब सूना-सूना
तन्हाई हाय ......तन्हाई ही भाई
तेरा नाम न निकलें मुहँ से
हो न तेरी रुसवाई ......
कोई कहे ........कोई सुने क्या
कैसी घड़ी ये आई
बसंत ऋतु क्यों आई
हाय! बसंत ऋतु क्यों आई !