" कहाँ हो फूलों , ऐ रंग भरे फूलों
क्यों सताते हो ..........!
दिखा के रंग अपनी नजाकत के
क्यों छुप जाते हों .......!
मिले थे कल ,लगता हैं फिर भी
बरसों बीत गये ......!
सावन आया ,पतझड़ आया ,ऋतु बसंत फिर आई
सब ने अपना रस बरसाया
बीत गया सावन का यौवन
उजड़ गया पतझड़ में उपवन
बसंत ऋतु करें फिर श्रींगार बहार में ,
फिर उड़े पखेरू लहर कतार में,
फिर तुम भी कर गुजरे कुछ इंतजार में
फिर भवरें चूमें फूलों को .....प्यार में ,
फिर खुशबू लौट आई.......बसंत बहार में
फूलों ,कहाँ हो फूलो
फूलों ,रंग बिरंगे फूलों
तुम मत भूलो -तुम मत भूलो
फिर आओ ,फिर रंग बिखरों बहार में
कहाँ हो फूलों -कहाँ हो फूलों
ऐ रंग भरें फूलों दिल कहे हर पुकार में !
क्यों सताते हो ..........!
दिखा के रंग अपनी नजाकत के
क्यों छुप जाते हों .......!
मिले थे कल ,लगता हैं फिर भी
बरसों बीत गये ......!
सावन आया ,पतझड़ आया ,ऋतु बसंत फिर आई
सब ने अपना रस बरसाया
बीत गया सावन का यौवन
उजड़ गया पतझड़ में उपवन
बसंत ऋतु करें फिर श्रींगार बहार में ,
फिर उड़े पखेरू लहर कतार में,
फिर तुम भी कर गुजरे कुछ इंतजार में
फिर भवरें चूमें फूलों को .....प्यार में ,
फिर खुशबू लौट आई.......बसंत बहार में
फूलों ,कहाँ हो फूलो
फूलों ,रंग बिरंगे फूलों
तुम मत भूलो -तुम मत भूलो
फिर आओ ,फिर रंग बिखरों बहार में
कहाँ हो फूलों -कहाँ हो फूलों
ऐ रंग भरें फूलों दिल कहे हर पुकार में !
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