सब कुछ संग -संग है सजनी......
जंगल की आग वहां .....
यहाँ पेट की अग्नि ......
सब कुछ संग -संग है सजनी......
जंगल की आग वहां .....
यहाँ प्रेम रूप अग्नि ......
सब कुछ संग -संग है सजनी......
जंगल अग्नि कब रुके मधुर पवन संग .....
भड़के जले जलाये वन -वनप्राणी.......
वन प्राणी निः सहाय विचरें .....
दुढ़े वन प्रेमी का साथ ओ सजनी.....
वन प्रेम -प्रेम रूप समान है सजनी ....
जब वन जले जलाये तन मन .....
जंगल की आग वहाँ.......यहाँ प्रेम रूप अग्नि
सब कुछ संग -संग है सजनी
सब कुछ संग -संग .....
पेड़ जलें ,जब जलें वन उपवन ,
प्रेमी प्रेम रोग में तड़फे......
वन प्रेम -प्रेम रोग पुराना.....
किस ने किस को कितना जाना
जंगल की आग वहां .....
यहाँ पेट की अग्नि ......
सब कुछ संग -संग है सजनी......
जंगल की आग वहां .....
यहाँ प्रेम रूप अग्नि ......
सब कुछ संग -संग है सजनी......
जंगल अग्नि कब रुके मधुर पवन संग .....
भड़के जले जलाये वन -वनप्राणी.......
वन प्राणी निः सहाय विचरें .....
दुढ़े वन प्रेमी का साथ ओ सजनी.....
वन प्रेम -प्रेम रूप समान है सजनी ....
जब वन जले जलाये तन मन .....
जंगल की आग वहाँ.......यहाँ प्रेम रूप अग्नि
सब कुछ संग -संग है सजनी
सब कुछ संग -संग .....
पेड़ जलें ,जब जलें वन उपवन ,
प्रेमी प्रेम रोग में तड़फे......
वन प्रेम -प्रेम रोग पुराना.....
किस ने किस को कितना जाना
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