पता पूछते हैं .....
पता पूछते हैं तेरा ....तेरे शहर में .....
पता पूछते हैं शहर शहर में
खोयें खोये से घूमते हैं .......राहों में
पेड़ो के पत्ते राह में मिलते हैं ......हँसते हैं
दीवाना बताते हैं देखकर पूछते हैं हाल.....
पेड़ो के पत्ते बाग के हँसते हैं .......
पूछते हैं कहते हैं क्यों हो रहे बेहाल ......
बेचैनी के आलम में तेरा चेहरा दुढ़ते हैं
तेरे शहर में शहर में तुझे दुढ़ते हैं
पता पूछते हैं ........!
पता पूछते हैं तेरा ....तेरे शहर में .....
पता पूछते हैं शहर शहर में
खोयें खोये से घूमते हैं .......राहों में
पेड़ो के पत्ते राह में मिलते हैं ......हँसते हैं
दीवाना बताते हैं देखकर पूछते हैं हाल.....
पेड़ो के पत्ते बाग के हँसते हैं .......
पूछते हैं कहते हैं क्यों हो रहे बेहाल ......
बेचैनी के आलम में तेरा चेहरा दुढ़ते हैं
तेरे शहर में शहर में तुझे दुढ़ते हैं
पता पूछते हैं ........!
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