Monday, 19 December 2011

हम जब मर जायेंगे ,क्या मुक्ति पा जायेंगे ....!

हम जब मर जायेंगे ,क्या मुक्ति पा जायेंगे.....
नही ....!  दूरिया तज क्र तेरे पास रहेंगे .....!
शक्ति पा जायेंगे , और नई, आयेंगे लौट पास तेरे .....
रहेंगे तेरी  यादो में.....तुझ में समां जायेंगे ......
तेरी जुल्फों में .....तेरे दिल में बसेरा होगा
कतरा -कतरा खून में घूमेंगे ....चूमेंगे तुझे .....
और तेरी सांसो में .....तेरे गोरे गोलों की गहराई में समां जायेंगे.....
खूब बहुत खूब ......
फिर ख्वाबो की तस्वीर उभरती है ,
किसी कोने से चुपके -चुपके ,
मछलिया का साथ था ,सुना था पिछले जन्म में...
इस जन्म में पेड़-पत्तों,फूल -काटों का साथ पाया है
अब इक कहानी आने वाले कल की शुरू होगी
इस जन्म से नये जन्म के साथ
जब गरम सर्द हवाए चलेंगी .....और ...संग साथ तेरा होगा        
उड़ान तेरे ख्वाबो संग होगी
तेरा साथ .....तेरा अहसास
फिर बिना जन्म के पाएंगे .....
हम जब मर जायेंगे ....क्या मुक्ति पा जांएगे
नही तुझमे समां जायेंगे !!    

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