Tuesday, 20 December 2011

अमलतास ,नीम ,गुलमोहर

अमलतास ,नीम ,गुलमोहर संग यौवन तेरा ......
                           खिल -खिल जाये ,खिल खिल जाये ,
ग्रीष्म ऋतु में तप कर......
                            कुछ चमके पर कुछ तडपाये.....
जेठ मास की तपिश की खोज कही से .....            
श्रावन मास की बदली लाये ......
                             वर्षा ऋतु की आस बंधाये .....
श्रावन मास की छवि सुहानी
खिला मन -उपवन संग बरखा रानी
रंग बिरगें फूलों संग अठखेली .....करे सहेली
बूंदनाया फिर लट में समायें
गोरे गालों की लट काली सी
चूमे लाली गालों की
गाल कटोरे होठ गुलाबी
अमलतास ,नीम ,गुलमोहर मिल संग करें शराबी        
नैन भरें कारें कजरारे
तीर सरीखे वारसे मारें
जाय फिर न इक वार भी खाली
अमलतास ,नीम , गुलमोहर संग यौवन तेरा
खिल -खिल जायें, खिल-खिल जायें !  

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