पर्यावरण दिवस - 5 जून- हर वर्ष हमने मनाया,
कभी जल निधि को दी आवाज ............!
कभी कटे जंगलो -पेड़ों की कमी को आधार बनाया........!
तरह -तरह के गीत गा कर -धरती माँ के जख्मों को सहलाया ............!
पेड़ काटने फिर भी न छोड़े..........,
पानी भी जी भर कर फैलाया........,
जनता जनार्दन रही बढ़ती हर पल........,
इंसानी जरूरतों का हल - प्राणी फिर भी कर न पाया !
सभी धर्मो के देवता हुए हतप्रभ ,
प्राणी जगत पर्यावरण की वेदना - फिर भी समझ न पाया,
जब -जब धरती ने कर्वट बदली ........,
और सुनामी सा रूप अपना दिखाया ,
पर्यावरण बचाओ ............पर्यावरण बचाओ............
चिल्लाया फिर प्राणी ..........,
पर यह नशा फिर रहा कुछ दिन ही सीमित............
फिर वर्ष बीता...........नया वर्ष आया
पर्यावरण दिवस - 5 जून फिर हमने मनाया,
............................फिर हमने मनाया!
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