......का भर लायुं जमुना से मटुकी....
जब जब जायुं मैं जमुना तीरे ...मटुकी भरने को,
हाय .....राम.... मैं अटकी ...मटकी....,
मटुकी, पाँव कीचड़ में अटके....,
फिर का भर लायुं, जमुना से मटुकी....,
जमुना तीर अब मोहे दर लागे......,
श्याम मनोहर भी अब न बुलाये, पिचेई या आगे....
मन न भर आये......, अब मोहे कछु न भये,
जमुना तीर बदलता जाए...,
मटुकी सुनी....डगर मोरी सूनी...,
तो का भर लाती.... जमुना से मटुकी................

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