डूबता चाँद .........उभरता चाँद
दूर कहीं दूर छितिज में
डूबता चाँद उभरता चाँद
प्रेमी मन की आस का चाँद
आस प्यार की साथ -साथ
निशा रानी भी हो कर हताश -फिर चांदनी में
उमा को है रह -रह खोजती ,
जलज ,अंबुज,सरोज मिल सब
सरोवर में तुझको खोजते ,
खी का करें हर पल इंतजार
हो के लाचार.........
कभी तरुवर की छाव में ....
कभी नदिया के पार.......
इंतजार और खामोश मुहब्बत का खेल
देखता चाँद .......!
डूबता चाँद उभरता चाँद....
चांदनी रात में निशा रानी की गोद में
उमा की ज्योति को खोजता चाँद
तलखिये हालात को एक मुहब्बत से
टकटकी लगाये देखता चाँद
डूबता चाँद ........उभरता चाँद !
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