Thursday, 10 November 2011

ओजोन परत की ओट से झाँकता सूरज

ओजोन परत की ओट 
से झाँकता सूरज हर दिन हर पल !     

उभरता सूरज सुबह छितिज़ से ,
डूबता सूरज दूर छितिज़ में,

सुबह की लालिमा बिखेरता सूरज,
ऊर्जा की भेंट दे कर,
शाम की लालिमा में लुप्त होता सूरज !

हँस-हँस के ग्रहणों से जूझता सूरज ,
चाँद सितारों को प्रकाश  ऊर्जा प्रदित करता सूरज ,
धरती पर बढ़ती इंसानी घृणा को झेलता सूरज ,
अपनी बढती तपिश का अहसास कराता सूरज !

धरती के हालात पर करुणा प्रकट करता सूरज 
भटके हुए प्राणी जगत को राह दिखाता सूरज,
मुहब्बत की तपिश से पिघलता सूरज ,
ओजोन परत की ओट से झाँकता सूरज ,
ओजोन छिद्र की  महिमा का अहसास कराता सूरज ,
21वीं सदी में प्राणी जगत को राह दिखाता सूरज 

चेतनहीन मनुष्य की चेतना जगाता सूरज 
ओजोन परत की ओट से झाँकता  सूरज 
प्राणी जगत का रखवाला सूरज !   


  







No comments:

Post a Comment