Saturday, 5 November 2011

वन उपवन में रहें हम....वृक्ष सुख पायें

वन उपवन में रहें हम....वृक्ष सुख पायें,
वृक्ष सुख सोचें... अब कहाँ वृक्ष सुख पायें...?
कटते वृक्ष....खडा मानव मूक द्रष्टा बन !!,
वन उपवन भी कटते जाएँ.....!!!!
वन उपवन में रहें हम....वृक्ष सुख पायें....

मानव मन फिर कहाँ वृक्ष सुख पायें ?
वृक्ष सुख मिले जहाँ हों वृक्ष अनेक,
वृक्ष सुख मिले जहाँ हों वन उपवन की टेक,
वन उपवन में रहें हम....वृक्ष सुख पायें....

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