फूलों की जिंदगी होती है थोड़ी
ये खिलते हैं कभी,कभी खिलते ही नहीं
कहाँ है ,कहाँ है अरमान इनके लिए
बस पल -पल मचलते हैं
यह अभी हैं ,अभी नहीं ,अभी कुछ और
रुक के खिलते हैं
जाने अनजाने में बस इनसे दिल लग जाता है
दिल में चंपा ,चमेली ,जूही ,गुलाब खिल जाता है
गुजर बसर फिर इक ख्वाब में बदल जाता है
इनसे दिल लगाने का मजा भी बहुत आता हैं!
उम्मीदों का इक फूल खिलता है ,इक मुरझा जाता है
हर फूल फिर सुन्दरता बिखेरने का वादा कर
मुरझा जाता है !
हर फूल यादों में कांटा बन कहीं चुभ जाता है !
फूलों की खोज में फिर हर ओर
कांटा ही कांटा नजर आता है !
फिर इस चाहत की राह में
चाहत का अनोखा नजारा नजर आता है !
फूल फिर भी फूल है !
जो यादों में रह-रह कर लहराता है !
भवरों को बुला के मुस्कुराता है !
फूलों की जिंदगी का अहसास कराता है !
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