Saturday, 5 November 2011

माँ मेरी ......

माँ मेरी ,
दे के सबक ,प्यार का ..........,
खो गई फिर राह में ,
राह मेरी अंजान थी,
राह वो दिखलाती रही ,
हम कदम पर था अँधेरा ,
रोशनी वो दिखलाती रही ,
कर दिया बेचैन दिल ने ,
दिल को वो समझाती रही ,
था सफर -लम्बा सफर ,
साथ वो आती रही ,
हर भटकती राह में ,
राह वो दिखलाती रही ,
माँ मेरी ,
दे के सबक प्यार का..........,
फिर याद करवाती रही ,
कमल कहकर ,जोत कहकर,
ज्योति कह कर -बुलाती रही ,
प्यार वो दिखलाती रही ,
चुपके चुपके सहलाती रही,
माँ मेरी ,
देकर सबक प्यार का ......,
भटके  को राह दिखलाती रही!   

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