Saturday, 5 November 2011

पर्वत ,झरने ,पेड़ और पंछी

पर्वत ,झरने ,पेड़  और पंछी,
कुछ खुशगवार लम्हें सजो रहे हैं 
"कुछ खुशगवार यादें ............"
"कुछ खुशगवार चेहरे............"
"कुछ खुशगवार पहलु ..........."
"कुछ मिल के संग साथी........."
"सपने संजो रहे हैं.................."
"कुछ है की लम्हा -लम्हा........."
"हम पा के खो रहे हैं ............"
"पर्वत ,झरने ,पेड़, और पंछी फिर भी"
कुछ खुशगवार लम्हें संजो रहे हैं !
".............लम्हें संजो रहे है !"


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