Thursday, 10 November 2011

फिज़ा मेरे देश की

फिजाँ मेरे देश की ,फिजाँ मेरे देश की
अनकहे रंगों में लिपटी 
तंगदिली के आलम में सिमटी
फिर भी खुशनुमा चेहरों में चमकें 
फिजाँ मेरे देश की ..........

देश में, परदेश में रहते है हम 
मिट्टी जहाँ की एक है ,मिट्टी जहाँ की एक है,
देश मेरा..........!!देश मेरा ...............!!
खून तेरा...........!!खून तेरा ............!!
बंदूक में गोलियों  की गिनती ...........
एक नही अनेक है ,
फिजाँ मेरे देश की............

खून का रंग सब एक है ,
पर दिलजले भी अनेक है ,
कोई सोचे ,कोई समझे  हैं वो कितने ...........!!
रंग को बदरंग कर दें ,कम नहीं अनेक हैं !
फिजाँ मेरे देश की........................

दिलजलों से कोई पूछे ............
दिल जलाते हों क्यों कर भला ............!!
दिल लगाना सीख लो..............
कुछ गुल खिलाना सीख लो .......
देश की हर फिजाँ को खुशनुमा बनाना सीख लो 
फिजाँ मेरे देश की...............  




  








                             





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